मुसलमान तरह-तरह के दस्तावेज जुटाने के लिए अभी से यहां-वहां दौड़ रहे हैं

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले कई बार और नागरिकता (संशोधन) विधेयक (कैव) पर चर्चा के दौरान भी इस बात पर जोर दिया कि एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता सूची) तो जरूर आएगा। साफ है कि एनआरसी और कैब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे के पूरक होंगे। देश के मुसलमान पिछले छह साल से वैसे ही काफी दवाव में हैं और अब उनमें, एक किस्म से, खलबली है। वे लोग तरह-तरह के दस्तावेज जुटाने के लिए यहां-वहां दौड़ लगा रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में लेक्चरर खालिद अल्वी कहते भी हैं: अभी जो सरकार है. उसकी परी कोशिश मसलमानों को हताश कर देने और हिंदुओं को मूर्ख बनाने की है। कोई अगर पाकिस्तान से आता है और दावा करता है कि वह पारसी है, तो मुसलमान भी पारसी के तौर पर आ सकते हैं लेकिन ये लोग बहुसंख्यक समुदाय को संदेश देना चाहते हैं कि इनलोगों ने मुसलमानों को दूसरे दरजे का नागरिक बना दिया है। अब तक तो ये लोग बहसंख्यक समुदाय को मूर्ख बनाने में सफल रहे ही हैं। पूर्व सांसद और लोकप्रिय उर्दू साप्ताहिक नई दुनिया के संपादक शाहिद सिद्दिकी बिना लाग-लपेट कहते हैं कि कैब वर्तमान शासन का सबसे खतरनाक कदम है। वह कहते हैं। हमने बहुत भारी दिल से विभाजन को स्वीकार किया, चाहे वह मौलाना आजाद, मौलाना हसेन अहमद मदनी, सरदार पटेल या महात्मा गांधी हों। हमलोगों (भारतीयों) ने जिन्ना के द्विराष्ट्र सिद्धांत को ठुकरा दिया। हमें यह याद रखने की जरूरत है कि दो लोगों ने द्विराष्ट्र के सिद्धांत की पैरवी की- एक,सावरकर जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और आज की भाजपा के सिद्धांतकार थे और उन्होंने ही हिंदुत्व शब्द का इजाद किया; और दूसरे, मोहम्मद अली जिन्ना जो पाकिस्तान के संस्थापक थे। यही दो लोग थे जिन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान दो राष्ट्र हैं लेकिन हमारे जैसे लोगों ने साफ तौर पर कहा कि हिंदू और इस्लाम दो धर्म हो सकते हैं लेकिन हिंदू और मुसलमान दो देश नहीं हो सकते। अब, जबकि सरकार यह कानून लेकर आई है जो मूलतः सावरकर और जिन्ना के द्विराष्ट्र सिद्धांत की पैरवी कर रहा है। आज, भाजपा जिन्ना के सिद्धांत को लागू कर रही है। भाजपा ऐसा देश बना रही है जिसमें सावरकर की टोपी और जिन्ना की शेरवानी है। शाहिद यह भी कहते हैं किः मूल रूप से, ये लोग (अभी सरकार में बैठे लोग) मुसलमानों से वोटिंग के अधिकार छीन लेना चाहते हैं क्योंकि वे मुस्लिम वोट को लेकर भय में रहते हैं, चूंकि उनकी यह सोच है कि वे मस्लिम वोट की वजह से चनाव हार जाएंगे। लेकिन इस देश के हिंदू जिनका दिल बड़ा है, सरकार के इन दमनकारी कदमों को ठुकरा देंगे। अभी सरकार की जो सोच है, उसी तरह की सोच ने अफगानिस्तान, लीबिया और सीरिया-जैसे देशों को तबाह कर दिया है। धर्म के नाम पर राजनीति करने वाला कोई भी देश कभी प्रगति नहीं कर सकता और वही देश प्रगति करेगा जो सबको अपने साथ लेकर चले।