बात थी 24 घंटे सस्ती बिजली की, पर घंटों रहती है गुल जेब अलग कट रही, वजह : निजी कंपनियों पर इनायत


नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद वादा किया था कि लोगों को 24 घंटे और सस्ती बिजली मिलेगी। लेकिन 5 साल और 100 दिन से अधिक बीतने के बावजूद 24 घंटे बिजली तो नहीं ही मिल रही है, इसकी दरें भी बढ़ती ही जा रही हैं। अति उत्साह में लिए गए मोदी सरकार के फैसलों का परिणाम अब राज्यों को भुगतना पड़ रहा है। मोदी सरकार ने बिजली क्षेत्र में चल रही यूपीए सरकार की कई योजनाओं के नाम बदले और एक के बाद एक कई योजनाएं नए सिरे से शरू की। वैसे. एक योजना ऐसी रही जो यपीए कार्यकाल से अलग रही। इसे उदय यानी उज्जवल डिस्कॉम्स एश्योरेंस योजना नाम दिया गया। इसका मकसद बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम्स) की माली हालत सुधारना था। 2014-15 में सभी डिस्कॉम्स पर लगभग 4.3 लाख करोड़ रुपये का उधार था और ये लगभग 3.8 लाख करोड़ रुपये के घाटे में थी। 5 नवंबर, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उदय को मंजूरी दी गई। उस समय बताया गया कि डिस्कॉम्स का उधार कम करने के लिए यह रामबाण योजना है। इससे न केवल डिस्कॉम्स की माली हालत सुधरेगी, बल्कि लोगों को भी 24 घंटे मिलने लगेगी। वैसे, यूपीए सरकार में डिस्कॉम्स की माली हालत को देखते हुए उन्हें 1.9 लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया था। लेकिन मोदी सरकार की खासियत रही कि केंद्र ने इसके लिए एक भी पैसा नहीं दिया, बल्कि राज्यों से कहा कि वे डिस्कॉम्स का लोन अपने ऊपर ले लें और उसके बाद केंद्र के बताए फॉर्मूले पर चलें तो आने वाले दिनों में बिजली की हालत सुधर जाएगीजिन राज्यों में गैरभाजपा सरकार थीं, उन्हें मनाने के लिए तत्कालीन विजली मंत्री पीयूष गोयल ने भरोसा दिलाया था कि उदय में शामिल होने पर उन्हें केंद्र की दूसरी योजनाओं में वरीयता दी जाएगी और कई तरह के लाभ दिए जाएंगे। फॉर्मूले के तहत ऐसी कोई खास तकनीक भी नहीं बताई गई थी जिससे वकाई डिस्कॉम्स नुकसान की बजाय मुनाफा कमाने लगती। केंद्र का फॉर्मूला साधारण था कि बिजली चोरी रोकनी होगी, बिल वसूली बढ़ानी होगी और साथ ही, बिजली की दरें बढ़ानी होंगी। इसे दरें बढ़ाने की बजाय तर्कसंगत करना बताया गया था।